होली पर कितने दिनों की रहेगी स्कूल छुट्टी, लगातार इतने दिन बंद रहने स्कूल Holi Holiday 2026

Holi Holiday 2026: होली एक सप्ताह भी दूर नहीं है, लेकिन भाजपा शासित तीन प्रदेशों में होली का अलग-अलग अवकाश होने से प्रदेश में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। राजस्थान में होलिका दहन का अवकाश 2 मार्च व धूलंडी का अवकाश 3 मार्च को है। जबकि हरियाणा व दिल्ली सरकार ने होली का अवकाश 4 मार्च को घोषित कर रखा है। त्योहारों पर अवकाश को लेकर सरकारी कैलेण्डर के कारण पहले भी भ्रम की स्थिति सामने आती रही है।

होली से पहले छुट्टियों पर बड़ा भ्रम

होली का त्योहार देशभर में उत्साह, रंग और उमंग के साथ मनाया जाता है। लेकिन इस बार होली आने से पहले ही छुट्टियों को लेकर बड़ा कन्फ्यूजन खड़ा हो गया है। खासतौर पर राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में रहने वाले सरकारी कर्मचारी, निजी संस्थानों के स्टाफ और आम लोग यह समझ नहीं पा रहे कि आखिर असली छुट्टी किस दिन है।

जहां एक ओर राजस्थान सरकार ने 2 मार्च को होलिका दहन और 3 मार्च को धूलंडी की छुट्टी घोषित की है, वहीं दिल्ली और हरियाणा सरकार ने 4 मार्च को होली का अवकाश तय किया है। तीनों ही राज्य भाजपा शासित हैं, ऐसे में अलग-अलग तारीखों की घोषणा ने लोगों की उलझन और बढ़ा दी है।

राजस्थान में 4 दिन लगातार छुट्टी

राजस्थान में इस बार होली के अवसर पर कर्मचारियों को लगातार चार दिन का अवकाश मिल रहा है। दरअसल, 28 फरवरी शनिवार और 1 मार्च रविवार का नियमित साप्ताहिक अवकाश पहले से ही तय है। इसके बाद राज्य सरकार ने 2 और 3 मार्च को होली का अवकाश घोषित कर दिया है।

इस तरह राजस्थान में सरकारी कार्यालय 28 फरवरी से 3 मार्च तक बंद रहेंगे। स्कूल-कॉलेज और कई निजी संस्थानों में भी इसी के अनुसार छुट्टियां रहने की संभावना है। हालांकि इस फैसले के बाद यह सवाल उठ रहा है कि अगर राजस्थान में 2-3 मार्च को छुट्टी है, तो दिल्ली और हरियाणा में 4 मार्च को क्यों?

दिल्ली और हरियाणा में 4 मार्च को अवकाश

दिल्ली और हरियाणा सरकार ने अपने आधिकारिक कैलेंडर के अनुसार 4 मार्च 2026 को होली का अवकाश घोषित किया है। दोनों राज्यों में सरकारी दफ्तर और कई शैक्षणिक संस्थान इसी दिन बंद रहेंगे।

इस फैसले के बाद सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है। जिनके परिजन अलग-अलग राज्यों में रहते हैं या जिनका कार्यक्षेत्र इन तीनों राज्यों में फैला हुआ है। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे होली कब मनाएं और यात्रा की योजना किस हिसाब से बनाएं।

पंचांग एक, तारीख अलग क्यों?

सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब पूरे देश में पंचांग एक ही माना जाता है, तो फिर छुट्टियों की तारीख अलग-अलग क्यों तय की गई? आमतौर पर होली का पर्व फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसके अगले दिन रंगों की होली यानी धूलंडी होती है। लेकिन विभिन्न राज्यों में स्थानीय परंपराओं और प्रशासनिक निर्णयों के आधार पर छुट्टियों में बदलाव देखा जाता है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जब धार्मिक आधार एक है, तो फिर प्रशासनिक स्तर पर अलग-अलग तारीख तय करना लोगों को भ्रमित करता है।

भारत सरकार के कैलेंडर के अनुसार अवकाश

इस पूरे मामले पर सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव नवीन जैन ने स्पष्ट किया है कि अवकाश की घोषणा भारत सरकार के कैलेंडर के अनुसार की जाती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें आमतौर पर केंद्र सरकार के अवकाश कैलेंडर को ध्यान में रखते हुए छुट्टियां घोषित करती हैं। उसी आधार पर होली का अवकाश तय किया गया है।

हालांकि लोगों का सवाल यह है कि यदि केंद्र का कैलेंडर आधार है, तो फिर तीनों राज्यों में तारीखें अलग क्यों हैं? इस पर सरकार की ओर से अभी तक कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

बदलाव पर सरकार का रुख

सूत्रों के मुताबिक, अभी तक घोषित छुट्टियों में किसी प्रकार के बदलाव पर विचार नहीं किया जा रहा है। राजस्थान में 2-3 मार्च का अवकाश पहले ही अधिसूचित किया जा चुका है और उसे बदलने की कोई आधिकारिक योजना फिलहाल नहीं है।

दिल्ली और हरियाणा सरकार भी अपने निर्णय पर कायम हैं। ऐसे में यह साफ है कि होली इस बार तीनों राज्यों में अलग-अलग दिन सरकारी छुट्टी के रूप में दर्ज होगी।

कर्मचारी संगठनों की नाराजगी

अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के प्रदेश अध्यक्ष गजेन्द्र सिंह राठौड़ ने इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है। उनका कहना है कि जब सभी राज्यों में एक ही पंचांग लागू होता है, तो फिर छुट्टियों की तारीख अलग-अलग क्यों रखी गई? इससे कर्मचारियों और आम जनता में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस विषय में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति न बने।

पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला

यह पहली बार नहीं है जब त्योहारों के अवकाश को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हो। पहले भी कई बार सरकारी कैलेंडर और स्थानीय पंचांग के बीच अंतर के कारण छुट्टियों की तारीखों पर विवाद सामने आया है।

कई बार किसी राज्य में त्योहार एक दिन पहले मनाया जाता है तो दूसरे राज्य में एक दिन बाद। लेकिन जब प्रशासनिक स्तर पर छुट्टी घोषित होती है, तो लोगों को स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाने से परेशानी बढ़ जाती है।

आम लोगों पर क्या असर?

इस अलग-अलग अवकाश का असर सिर्फ सरकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं है।

  • स्कूल और कॉलेजों के कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं।
  • निजी कंपनियों को अलग-अलग राज्यों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए अलग व्यवस्था करनी पड़ सकती है।
  • यात्रा और पारिवारिक कार्यक्रमों की योजना बनाना मुश्किल हो सकता है।

खासकर वे लोग जो राजस्थान-हरियाणा या दिल्ली-राजस्थान के बीच रोजाना आवाजाही करते हैं, उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है।

त्योहार की भावना पर असर

होली का त्योहार एकता, भाईचारे और खुशियों का प्रतीक है। लेकिन छुट्टियों की तारीख को लेकर पैदा हुआ भ्रम लोगों के उत्साह को कुछ हद तक प्रभावित कर रहा है।

कई परिवार ऐसे हैं जिनके सदस्य अलग-अलग राज्यों में नौकरी करते हैं। ऐसे में यदि छुट्टियां अलग-अलग दिन होंगी, तो वे एक साथ त्योहार मनाने से वंचित रह सकते हैं।

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