New Greenfield Highway: दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे का इंतजार कर रहे लाखों लोगों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। जानकारी के अनुसार इस हाईवे का उद्घाटन 13 मार्च को संभावित माना जा रहा है। हालांकि अभी आधिकारिक घोषणा बाकी है। लेकिन तैयारियों की रफ्तार और निरीक्षण की गतिविधियां यह संकेत दे रही हैं कि परियोजना अपने अंतिम चरण में है।
रविवार को एनएचएआई के चेयरमैन संतोष यादव ने अधिकारियों की टीम के साथ दिल्ली से देहरादून तक पूरे रूट का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा इंतजाम और अधूरे कार्यों की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की।
बड़गांव इंटरचेंज पर सख्त निर्देश
निरीक्षण के दौरान बड़गांव इंटरचेंज को विशेष रूप से देखा गया। यहां कुछ कार्य अधूरे पाए गए। जिस पर चेयरमैन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि काम को जल्द से जल्द पूरा किया जाए।
यह इंटरचेंज ट्रैफिक प्रबंधन के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। यदि यहां कार्य समय पर पूरा हो जाता है तो दिल्ली से सहारनपुर और आगे देहरादून की यात्रा और भी आसान हो जाएगी।
सहारनपुर में 74 किमी लंबा हाईवे
सहारनपुर जिले में हाईवे की कुल लंबाई 74 किलोमीटर है। इनमें से 41 किलोमीटर हिस्से पर पिछले दो महीनों से वाहन चल रहे हैं। इस आंशिक शुरुआत से यात्रियों को काफी राहत मिली है।
हालांकि कुछ स्थानों पर अभी लाइटिंग और पौधारोपण का काम जारी है। इन कार्यों के चलते कुछ जगहों पर अस्थायी बैरिकेडिंग की गई है। ताकि निर्माण कार्य में बाधा न आए और सुरक्षा बनी रहे।
15 दिन में शेष काम पूरा करने का दावा
एनएचएआई बागपत डिवीजन के परियोजना निदेशक नरेन्द्र सिंह ने जानकारी दी कि हाईवे पर बचा हुआ काम अगले 15 दिनों में पूरा कर लिया जाएगा। इसमें साइड सुरक्षा, साइन बोर्ड, लाइटिंग और हरित पट्टी का कार्य शामिल है। यदि यह समयसीमा पूरी होती है तो उद्घाटन में कोई बड़ी बाधा नहीं रहेगी।
20-25 मिनट में देहरादून
इस हाईवे का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बिहारीगढ़ से देहरादून का सफर अब सिर्फ 20 से 25 मिनट में पूरा हो रहा है। पहले शिवालिक की पहाड़ियों में अक्सर लंबा जाम लग जाता था। खासकर छुट्टियों और सप्ताहांत में यात्री घंटों फंसे रहते थे। लेकिन अब एलिवेटेड रोड और बेहतर कनेक्टिविटी के चलते लोगों को बड़ी राहत मिली है।
टनल और अंडरपास से बेहतर कनेक्टिविटी
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर दो टनल का निर्माण किया गया है। गागलहेडी से देहरादून तक सभी अंडरपास और फ्लाईओवर चालू कर दिए गए हैं। नागल के लाखनौर से गणेशपुर तक 41 किमी निर्माण पूरा हो चुका है। इससे ट्रैफिक का दबाव बंट गया है और यात्रा सुगम हो गई है।
मानसून को ध्यान में रखकर मजबूत निर्माण
देहरादून क्षेत्र में मानसून के दौरान बरसाती नदियों में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए विशेष इंतजाम किए गए हैं। एलिवेटेड रोड के 575 पिलर्स में से 24 पिलर्स पर डेढ़ से दो फीट मोटी जैकेट चढ़ाई गई है। यह सुरक्षा उपाय तेज बहाव से पिलर्स को सुरक्षित रखने के लिए किया गया है।
डाटकाली मंदिर के पास विशेष इंतजाम
डाट काली मंदिर के पास 340 मीटर लंबी तीन लेन सुरंग बनाई गई है, जिसकी लागत लगभग 1995 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह सुरंग हाईवे की खास पहचान मानी जा रही है। इसके अलावा यहां मोबाइल टावर इंस्टालेशन और सुरक्षा से जुड़े सभी काम पूरे हो चुके हैं।
राजाजी पार्क से गुजरती एलिवेटेड रोड
इस ग्रीनफील्ड हाईवे की सबसे खास बात है कि यह राजाजी नेशनल पार्क की वादियों से होकर गुजरता है। करीब 12 किलोमीटर लंबी वाइल्ड लाइफ एलिवेटेड रोड बनाई गई है, ताकि वन्यजीवों को कम से कम नुकसान हो।
इसके साथ ही:
- 6 एनिमल अंडरपास
- 2 हाथी अंडरपास
- 113 अंडरपास
- 76 किमी सर्विस रोड
- 62 बस शेल्टर
- 16 एंट्री-एग्जिट पॉइंट
- 5 रेलवे ओवरब्रिज
इन सुविधाओं से यह हाईवे आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल दोनों बन गया है।
उत्तर भारत की लाइफलाइन बनने की तैयारी
दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर भारत की नई लाइफलाइन बनने की तैयारी में है। इससे पर्यटन, व्यापार, और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच आवाजाही पहले से कहीं ज्यादा आसान होगी। यदि 13 मार्च को उद्घाटन होता है, तो यह क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी।